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भारत-इंग्लैंड के बीच फ्री ट्रेड राह में 'शराब व सेवा' बन सकती है नई बाधा

सूत्रों के मुताबिक भारत-इंग्लैंड मुक्त व्यापार समझौता के बीच इंग्लैंड के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक भारत आ सकते हैं। यह कहा जा रहा है कि वह 29 अक्टूबर को लखनउ में आयोजित हो रहे विश्व क्रिकेट मैच को देखने के लिए भारत आ सकते हैं। इस दिन इंग्लैंड और भारत का मैच है।

संतोष 

 इंग्लैंड और भारत के बीच मुक्त व्यापार समझौता या फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के इसी साल होने की उम्मीद की जा रही थी। दोनों देशों ने यह उम्मीद जाहिर की थी कि इस समझौता पर इसी साल हस्ताक्षर हो सकते हैं। लेकिन इस संधि के सामने अब नई समस्या उत्पन्न होती दिख रही है। यह कहा जा रहा है कि इंगलैंड की वाइन और सेवा क्षेत्र की कंपनियों को लेकर भारत के सीमित कदम उठाने से इंग्लैंड पर यह दबाव है कि वह इस मामले पर भारत से और कड़ा मोलभाव करे। जिससे इंग्लैंड के कारोबारी हित का नुकसान न हो।

इंग्लैंड की पेशेवर सेवा कंपनियां, जो एकाउंट और लॉ फर्म से जुड़ी हैं, उनका कहना है कि भारत ने उनको उतनी रियायत नहीं दी है। जिससे वे आसानी से भारत में अपना काम कर पाएं। जबकि दूसरी ओर भारतीय शराब कंपनियां इंग्लैंड को हर श्रेणी की शराब में खुली छूट देने के खिलाफ है। उनका कहना है कि इससे भारतीय शराब उद्योग तबाह हो जाएगा। ऐसे में भारतीय शराब उद्योग को बचाने के लिए इस समझौता में समुचित कदम उठाए जाने चाहिए। भारतीय शराब  कंपनियों की इस मांग का इंग्लैंड की शराब कंपनियां विरोध कर रही हैं। उनका कहना है कि नियम ऐसे हो। जिससे किसी एक पक्ष को सरकारी ताकत न मिले।

भारत—इंग्लैंड मुक्त व्यापार समझौता के बीच इंग्लैंड के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक भारत आ सकते हैं। File Photo

सूत्रों के मुताबिक भारत—इंग्लैंड मुक्त व्यापार समझौता के बीच इंग्लैंड के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक भारत आ सकते हैं। यह कहा जा रहा है कि वह 29 अक्टूबर को लखनउ में आयोजित हो रहे विश्व क्रिकेट मैच को देखने के लिए भारत आ सकते हैं। इस दिन इंग्लैंड और भारत का मैच है। जो क्रिकेट विश्व कप के सबसे अहम मैच में एक माना जा रहा है। यह भी चर्चा है कि इस मैच के उपरांत वह भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद दोनों देश के बीच मुक्त व्यापार समझौता पर हस्ताक्षर कर सकते हैं।

लेकिन इस बीच यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि सेवा क्षेत्र और शराब क्षेत्र से संबंधित इंग्लैंड की कंपनियों की मांग की वजह से संभवत: इस समझौता में कुछ और देरी हो सकती है। इसकी वजह यह है कि ये ऐसे क्षेत्र हैं। जिस पर दोनों ही देशों की कंपनियों का अपने देश की सरकार पर दबाव है। जिसकी वजह से दोनों देश को बीच का ऐसा रास्ता निकालने की कवायद करनी पड़ सकती है। जिससे उनकी देश की कंपनियों को नुकसान न हो।

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