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एक आक्रमण... जिसे मानवता के नाम पर रोकना होगा

प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार हमास से निपटने के नाम पर आतंकियों के एक और जाल में फंस गई है। पुरुषों, महिलाओं और बच्चों की अंधाधुंध हत्या वैश्विक चेतना को झकझोरने वाली है।

जंग के बीच जीवन... Image Courtesy : UN

गाजा से सक्रिय खूंखार हमास संगठन द्वारा इजराइल पर किए गए भयानक आतंकी हमले को अब लगभग एक महीना हो गया है। कहा जाता है कि 7 अक्तूबर को यहूदी राज्य में लगभग 1400 लोगों की जान चली गई थी। आतंकवादियों को यह अच्छी तरह पता था कि प्रतिक्रिया इतनी व्यापक होने वाली है कि इसका खामियाजा निर्दोष नागरिकों को भुगतना पड़ेगा। दुनिया जानती है कि आतंकवादियों को शर्म नहीं आती। वे कायर होने के नाते महिलाओं और बच्चों के पीछे, अस्पतालों और पूजा स्थलों में छिपते हैं और यही वे ठिकाने हैं, जहां इजराइल के जवाबी हमलों में मरने वालों की संख्या अधिक रही है।

माना जाता है कि 10,000 से अधिक नागरिक मारे गए हैं और सैकड़ों अन्य लोग मलबे में दबे हो सकते हैं। दुनिया इजराइल की प्रतिक्रिया को जवाबी हमले के रूप में देख रही है और जमीन का वह टुकड़ा जहां लगभग 20 लाख लोग रहते हैं उसे सील कर दिया गया है। वहां मुसीबत के मारों के पास भोजन, पानी और बिजली तक नहीं है। सैन्य प्रतिक्रिया में आनुपातिकता का विलाप करने वालों के लिए बेहतर होगा कि वे वास्तविकता के प्रति सचेत हो जाएं। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार हमास से निपटने के नाम पर आतंकियों के एक और जाल में फंस गई है। पुरुषों, महिलाओं और बच्चों की अंधाधुंध हत्या वैश्विक चेतना को झकझोरने वाली है। दूसरी ओर, आज दुनिया हमास के अत्याचार को काफी हद तक भुला चुकी है। यह सब फिलिस्तीनियों की पीड़ा पर केंद्रित है। हर दिन जमीन और हवा से हमले जारी हैं। कम से कम मानवीय दृष्टिकोण से इजराइल पर हमलों को विराम देने का दबाव बढ़ रहा है और अमेरिका में जो बाइडेन प्रशासन अपने कुछ अरब मित्रों के बीच असहाय दिखता है। किंतु अब समय आ गया है कि गाजा में नागरिकों की हत्या को रोका जाए क्योंकि प्रधानमंत्री नेतन्याहू को यह अहसास होना चाहिए कि अगर गाजा को नष्ट कर दिया गया तब भी हमास अलग नाम और रूप में वहां मौजूद रहेगा।

पश्चिम, मध्य पूर्व और फिलिस्तीनियों की भलाई चाहने वाले अन्य देशों को उस पागलपन से स्थायी रास्ता खोजने के लिए एक राजनीतिक समाधान की तलाश करनी चाहिए जो इस क्षेत्र को अनिश्चितता में डुबो रहा है। सच तो यह भी है कि 9/11 के बाद अमेरिका और अन्य प्रमुख खुफिया एजेंसियों ने हमास से अपनी नजरें हटा ली थीं और अफगानिस्तान व इराक जैसे देशों में सैन्य हस्तक्षेप के लिए फर्जी बहाने तलाशे जाने लगे थे। बलि के बकरों की खोज शुरू हो गई थी। दुनिया में सर्वश्रेष्ठ मोसाद भी 'सो' गया था। पर फिलहाल हमारा पूरा ध्यान गाजा पर आई आपदा को रोकने पर होना चाहिए। यहां प्रतिशोध नहीं रणनीतिक सोच की जरूरत है।

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