हिंदी फिल्म का एक मशहूर गाना है- ‘दिल तो है दिल, दिल का ऐतबार क्या कीजे।’ ये गाना प्रेम की आतुरता से जुड़ा है। लेकिन आज के जमाने में यह गाना दूसरा ही अर्थ दे रहा है। हर उम्र में जिस तरह से हार्ट के मरीज नजर आ रहे हैं, उससे वाकई लगने लगा है कि अब इस दिल का कोई ऐतबार नहीं रहा है। पूरी दुनिया में हृदय रोगों से मरने वाले लोगों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। इसके बावजूद मेडिकल साइंस निराश नहीं है। उसका कहना है कि अगर दिनचर्या में बदलाव कर लिया जाए, शरीर को थोड़ा सा ‘कष्ट’ पहुंचाया जाए और खानपान में सावधानी बरती जाए तो दिल ‘जवान’ बना रह सकता है।
भारत में हिंदी फिल्मों के मशहूर हास्य कलाकार सतीश कौशिक की हाल में हार्ट अटैक से मौत हो गई। उनसे जुड़े लोग बता रहे हैं कि अटैक आने से पहले तक वह बिल्कुल स्वस्थ थे और उन्हें कोई समस्या महसूस नहीं हो रही थी। बस दिक्कत यह थी कि उनका वजन उम्र व हाइट के हिसाब से ज्यादा था। इससे पहले भारत के मशहूर स्टैंडअप आर्टिस्ट राजू श्रीवास्तव भी हार्ट अटैक के चलते जान गंवा चुके हैं। राजू तो नियमित जिम जाते थे, वजन भी नॉर्मल था और हमेशा एक्टिव रहते थे। यह तो भारत के एक-दो केस हैं। लेकिन पूरी दुनिया से हार्ट अटैक की खबरें आ रही हैं, हैरानी की बात यह है कि इसकी गिरफ्त में अब युवा भी आने लगे हैं। रिसर्च यह भी बता रही हैं कि शरीर में होने वाली कुछ अन्य बीमारियां धीरे-धीरे व्यक्ति को दिल की बीमारी की ओर भी धकेल रही हैं। इलाज किसी और बीमारी का होता है और बॉडी का कोई दूसरा पार्ट बीमार होने लग जाता है।
तो क्या इलाज है दिल का? कैसे इसके ‘दर्द’ को कंट्रोल किया जा सकता है। डॉक्टर कह रहे हैं कि सबसे पहले यह जान लें कि दिल और दिमाग का बहुत ही गहराई से नाता है। अगर दिमाग में तनाव या लगातार चिंता रहेगी, जिसे एन्जाइटी भी कहते हैं तो दिल का ‘टूटना’ संभव है। लेकिन यह तनाव या चिंता रुकेगी कैसे, क्योंकि उर्दू के मशहूर शायर मिर्जा गालिब कह चुके हैं कि जब तक जिंदा हैं, जब तक दुख-दर्द से निजात नहीं मिल सकती। तो फिर क्या करें। इस मसले पर हरियाणा की भगतफूल सिंह सरकारी यूनिवर्सिटी के आयुर्वेद विभाग की प्रमुख प्रो. वीना शर्मा का कहना है कि वाकई चिंता या तनाव को रोका नहीं जा सकता, लेकिन इसका असर कम किया जा सकता है। इसका सबसे कारगर कदम है कि हम योग को अपनाएं। असल में चिंता या तनाव मानसिक समस्या है और योग मानसिक स्वस्थता प्रदान करता है। अगर हम रोजाना कम से कम 30 मिनट वॉक करें और कम से कम 10 मिनट प्राणायाम (सांस से जुड़े योग जिनमें लोम-अनुलोम, भ्रामरी आदि शामिल हैं) कर लें तो एंजाइटी के ताप को कम किया जा सकता है। डॉ. शर्मा के अनुसार शरीर को शांत रखना भी जरूरी है। योग मानसिक रूप से शांत रहना सिखाता है। साथ में आप अगर पॉजिटिव संगीत सुनें, यात्रा पर जाएं, या रुचि के अनुसार धर्मस्थलों में कुछ देर बैठें तो एंजाइटी अवश्य कम होगी।
मुंबई यूनिवर्सिटी के पूर्व डीन व वैद्यराज दीनानाथ उपाध्याय के अनुसार अगर आप मन को शांत चित्त रखें और शरीर को एक्टिव रखें तो हार्ट समेत कई बीमारियों से दूर रह सकते हैं। अगर हम हेल्दी डाइट लेंगे तो शरीर और मन अपने आप शांत रहेंगे। प्रयास करें कि हमेशा ताजा भोजन खाया जाए। भोजन में हरी सब्जियों व फलों की मात्रा बढ़ाई जाए। नॉनवेज खाते हैं तो ध्यान रखें कि वह बहुत फैटी नहीं होना चाहिए। लोगों की दिनचर्या इतनी अधिक व्यस्त हो गई है कि शारीरिक श्रम छूटता सा जा रहा है जबकि यह बहुत आवश्यक है। असल में खराब लाइफ स्टाइल जिसमें एक्सरसाइज का न होना, शुगर से भरपूर अस्वस्थ डाइट और तनाव हमारे दिल को काफी नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसलिए संतुलित आहार लें और प्रोसेस्ड और ट्रांस फैट को भोजन से दूर रखें। अगर खानपान ठीक होगा और शारीरिक श्रम लगातार करेंगे तो मोटापा नहीं बढ़ेगा। मोटापा रोक लिया तो दिल समेत कई बीमारियों से बच सकते हैं। लोग आज कामों में शरीर को व्यस्त रखते हैं। असल में हमें ऐसे काम करने चाहिएं जिससे मन या दिमाग व्यस्त रहे। हार्ट अपने-आप हेल्दी रहेगा।
हार्ट स्पेशलिस्ट डॉ. सुरेश मित्तल का कहना है कि रोजाना एक्सरसाइज आपकी दिल की सेहत को ठीक रखेगी। जब भी वक्त मिले, शरीर को कुछ ‘कष्ट’ दें। हमारी जिस प्रकार की दिनचर्या है, उस हिसाब से किसी वक्त एक्सरसाइज करेंगे तो वह फायदा पहुंचाएगी। टेंशन को मैनेज करने के उपाय करें, इसके लिए योग, ध्यान करना, अच्छी नींद लेना या फिर थेरेपिस्ट से सलाह लेते रहें। शराब और स्मोकिंग से बचें। अगर यह आदत नहीं छूट रही है तो इन्हें कम करने का प्रयास करें, वरना सारी मेहनत बेकार है। असल में ये दोनों व्यसन (Addiction) हार्ट के अलावा लीवर, दिमाग व अन्य बीमारियों को पैदा करते हैं। अगर आप 40 साल से ऊपर के हो गए हैं तो नियमित रूप से बॉडी चेकअप करवाएं। इससे दिल का दौरा, स्ट्रोक, हाई बीपी, कोलेस्ट्रॉल और दूसरी कई गंभीर बीमारियों का पता चलता रहता है और उनसे बचने के लिए इलाज भी शुरू हो जाता है।