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अमेरिका में सिख सैनिक ने ऐसे साधा सैन्य सेवा और आस्था के बीच संतुलन, खोली नई राह

'अकादमी में दाढ़ी कटाने के दो सप्ताह बाद तक तो मैं आईना भी नहीं देख पाया था। उस समय मैंने अपना सारा ध्यान इस बात पर लगाया कि बस एक अच्छा कैडेट बनना है। पिता की एक बात हमेशा याद आती थी कि अगर किसी व्यवस्था को बदलना चाहते हो तो पहले उसका हिस्सा बनो।'

आप अपने मन की करना चाहें और अपने ही नियमों पर चलें, ऐसा या तो होता नहीं या फिर अपवाद स्वरूप ही संभव है। पंजाब का एक सिख किशोर जब अमेरिका में कैडेट बना तो उसके सामने दुविधा की स्थिति थी, पर उसने संतुलन की राह पकड़ी। उसने अपने मन की भी की और दुनिया के सबसे शक्तिशाली मुल्क के नियमों को भी मन मुताबिक बदलवाया।

मेजर सिमरतपाल सिंह बताते हैं कि पंजाब में दंगे हो रहे थे तो पिता देश से कहीं निकलना चाहते थे। किसी तरह अमेरिका में शरण मिली। पहले कैलिफोर्निया में रहे फिर सिएटल आ गए। हाई स्कूल में जूनियर रहते पहली बार वेस्ट पॉइंट पर संयुक्त राज्य सैन्य अकादमी (फोर्ट लीवेनवर्थ) के बारे में पता चला।

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