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पर्ड्यू विश्वविद्यालय में भारतवंशी छात्र की हत्या का केस टलेगा? कोर्ट से की गई ये मांग

साइबर सुरक्षा की पढ़ाई कर रहे दक्षिण कोरियाई 22 वर्षीय छात्र जी मिन शा पर आरोप है कि उसने 5 अक्टूबर को पहली मंजिल के मैककॉचियन हॉल रूम के अंदर डेटा साइंस के छात्र वरुण मनीष चड्ढा को चाकू मार दिया था। वरुण की मौत हो गई थी।

अमेरिका के पर्ड्यू विश्वविद्यालय में भारतीय-अमेरिकी रूममेट की हत्या के मामले में नया मोड़ आ गया है। अभियोजकों ने अदालत से आरोपी छात्र की मानसिक स्थिति की पड़ताल करने की गुहार लगाई है। उन्होंने न्यायाधीश से अनुरोध किया है कि आरोपी छात्र स्वास्थ्य की दृष्टि से ट्रायल के लिए फिट है या नहीं, इस बात का पुनर्मूल्यांकन किया जाए।

साइबर सुरक्षा की पढ़ाई कर रहे दक्षिण कोरियाई 22 वर्षीय छात्र जी मिन शा पर आरोप है कि उसने 5 अक्टूबर को पहली मंजिल के मैककॉचियन हॉल रूम के अंदर डेटा साइंस के छात्र वरुण मनीष चड्ढा को चाकू मार दिया था। वरुण की मौत हो गई थी। संदेह के आधार पर जी मिन को पुलिस ने हिरासत में लिया था।

दि जर्नल एंड कुरिअर ने खबर दी है कि अभियोजकों ने पिछले सप्ताह टिप्पेकेनोई सर्किट कोर्ट से अपने 14 नवंबर के उस आदेश को रद्द करने का अनुरोध किया है जिसमें शा की जांच करने के लिए चिकित्सा पेशेवरों को नियुक्त किया गया था। इसके बाद शा के वकील काइल क्रे ने अदालत से आग्रह किया कि यह देखना जरूरी है कि क्या शा मुकदमा चलाए जाने के लिए शारीरिक रूप से स्वस्थ है और कथित हत्या के समय उसकी मानसिक स्थिति क्या थी।

शा के वकील के अनुरोध पर कार्रवाई करते हुए न्यायाधीश ने हत्या के समय शा की मानसिक स्थिति का निर्धारण करने के लिए दो चिकित्सा पेशेवरों को नियुक्त किया है। इस मामले में अगली सुनवाई 2 दिसंबर को होनी है।

इंडियाना के कानून के अनुसार जिन लोगों को मुकदमा चलाने के लिए शारीरिक रूप से अनुपयुक्त पाया जाता है तो उन पर आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। जब तक आरोपी व्यक्ति को सक्षम नहीं माना जाता, तब तक के लिए ट्रायल स्थगित कर दिया जाता है।

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