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भारत की राजधानी दिल्ली गंभीर बाढ़ की चपेट में, कई इलाके पानी में डूबे

बाढ़ की गंभीरता का हाल यह है कि सभी स्कूल व कॉलेजों को रविवार तक के लिए बंद कर दिया गया है। इसके अलावा आवश्यक सेवाओं से जुड़े सरकारी कार्यालयों को छोड़कर बाकी सभी में भी कल तक अवकाश घोषित कर दिया गया है। प्राइवेट ऑफिसों में काम करने वालों को घर से ही काम करने की सलाह दी गई है।

सभी फोटो व वीडियो: न्यू इंडिया एब्रॉड

भारत की राजधानी दिल्ली आजकल गंभीर बाढ़ की चपेट में है। राजधानी के बीच से गुजरती यमुना नदी में बहुत अधिक पानी आ जाने से स्थिति गंभीर बनी हुई है। यमुना नदी से लगे अनेक इलाके पानी में डूब गए हैं। इसके अलावा कई और इलाकों में भी बाढ़ का पानी टकरा रहा है। माना जा रहा है कि शुक्रवार से बाढ़ का पानी उतरना शुरू हो जाएगा। लेकिन पहाड़ी इलाकों में बारिश का प्रकोप बढ़ा तो दिल्ली को फिर से बाढ़ से जूझना होगा।

राजधानी दिल्ली में शाम को यमुना का जलस्तर 208.62 मीटर तक पहुंच गया, जिसके कारण गंभीर बाढ़ के हालात बन गए। यह जलस्तर इतना अधिक है, जितना पिछले 100 में कभी नहीं पहुंचा। आंकड़ों की माने तो यमुना नदी का खतरे का निशान 204.83 मीटर है। लेकिन इस बार बाढ़ के पानी ने आगे-पीछे के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। यमुना में इतना अधिक पानी आने से इसके लो-लाइन एरिया में बसे इलाकों में बाढ़ की गंभीर स्थिति पैदा हो गई। वहां फंसे सैंकड़ों लोगों और जानवरों को निकालने के एनडीआरएफ की टीमों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। यमुना के किनारे बसी कुछ पॉश कॉलोनियों में भी बाढ़ के पानी के घुसने की सूचनाएं हैं, इनमें सिविल लाइन जैसे इलाके भी शामिल हैं। ऐसी जानकारी है कि यमुना से जुड़े गांवों की हजारों एकड़ फसल बाढ़ के चलते चौपट हो गई।

इस बाढ़ के कारण दिल्ली का ट्रैफिक सिस्टम पूरी तरह चरमरा गया। 

हालात इतने बिगड़ गए थे कि दिल्ली विधानसभा के पिछवाड़े बाढ़ का पानी हिलोरे लेने लगा और दिल्ली सचिवालय के बाहर भी बाढ़ का पानी टकराने लगा। दिल्ली के सबसे पुराने कश्मीरी गेट बस अड्डे को भी बंद करना पड़ा तो राजधानी के तीन वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बाढ़ का पानी भरने से ठप हो गए। लालकिले के पीछे की दीवार पर भी पानी पहुंच गया, जबकि यहां से यमुना करीब आधा किलोमीटर से अधिक की दूरी पर है। इस बाढ़ के कारण दिल्ली का ट्रैफिक सिस्टम पूरी तरह चरमरा गया। दिल्ली के सबसे महत्वपूर्ण रिंग रोड पर बाढ़ का पानी भरने से वहां ट्रैफिक बंद करना पड़ा, जिसके चलते अंदरुनी सड़कों पर ट्रैफिक बढ़ गया और व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। बाढ़ के पानी के चलते सरकारी बस सेवाएं बुरी तरह बाधित हो गईं, वो तो भला हो मेट्रो ट्रेन का, जिसने दिल्ली के सिस्टम को ठप होने से बचा लिया।

सरकार ने प्राइवेट ऑफिसों में काम करने वाले लोगों को सलाह दी है कि वह घर से ही काम करें। 

बाढ़ की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि राजधानी के सभी स्कूल व कॉलेजों को रविवार तक के लिए बंद कर दिया गया है। इसके अलावा आवश्यक सेवाओं से जुड़े सरकारी कार्यालयों को छोड़कर बाकी सभी में भी कल तक अवकाश घोषित कर दिया गया है। सरकार ने प्राइवेट ऑफिसों में काम करने वाले लोगों को सलाह दी है कि वह घर से ही काम करें। दिल्ली पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि बाढ़ पर नजर रखने और किसी अनहोनी को टालने के लिए बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में पुलिस की गश्त बढ़ाई जा रही है। सिविल डिफेंस के वॉलंटियरों की भी छुट्टियां कैंसल कर दी गई हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का कहना है कि उनके सभी मंत्री बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का दौरा कर लोगों को परेशानी से बचाने के उपाय तलाश रहे हैं। बाढ़ग्रस्त लोगों को आशियाना मुहैया कराने के लिए कई इलाकों में राहत शिविर लगाए गए हैं, जहां पीड़ितों के खाने पीने का ध्यान रखा जा रहा है।

माना जा रहा है कि शुक्रवार से बाढ़ का प्रकोप कम होना शुरू हो जाएगा। लेकिन इसमें भी बड़ा पेच यह है कि दिल्ली में होने वाली बारिश कभी भी बाढ़ का खतरा पैदा नहीं करती है। असल में पहाड़ी राज्यों हिमाचल व उत्तराखंड में होने वाली बारिश दिल्ली के लिए बाढ़ा का खतरा पैदा करती है। वहां भारी बारिश होते ही उसका पानी यमुना की ओर मुड़ जाता है और बहता हुआ दिल्ली में बाढ़ का सबब बन जाता है। अगर इन राज्यों में आगामी दिनों में बारिश नहीं हुई तो दिल्ली की स्थिति सामान्य हो जाएगी और अगर बारिश हो गई तो दिल्ली में फिर से बाढ़ का खतरा मंडरा सकता है। गौरतलब है कि इससे पहले दिल्ली में वर्ष 1978 में भयंकर बाढ़ आई थी और उसने खासी तबाही मचाई थी। इस बार की बाढ़ ने 45 साल पहले की बाढ़ का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। उस वक्त यमुना का जलस्तर 208.49 मीटर पहुंचा था।

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