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विदेशी चंदा लेने वाले 1827 भारतीय NGO पर गिरी गाज, इतना मिला था फंड

गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि इन 1827 FCRA पंजीकृत NGOs को मिलने वाले विदेशी योगदान का गलत उपयोग किया जा रहा था। ये NGO इस फंड को डायवर्ट कर रहे थे। इस संबंध में सरकार को कुछ शिकायतें प्राप्त हुई थीं। जिन पर कार्रवाई करते हुए भारत सरकार ने एनजीओ का एफसीआरए रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया।

भारत सरकार ने पिछले पांच वर्षों में विदेशी मदद लेने वाले गैर सरकारी संगठनों (NGO) पर जमकर चाबुक चलाया है। भारत सरकार में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने 15 मार्च को लोकसभा में बताया कि 2018 से 2022 के दौरान 1,827 NGO के FCRA पंजीकरण प्रमाणपत्र रद्द किए गए। भारतीयों कानूनों का उल्लंघन करने पर ये कदम उठाया गया है।

गृह राज्य मंत्री ने बताया कि 10 मार्च 2023 तक देश में 16,383 NGO ऐसे हैं जिनके FCRA पंजीकरण प्रमाण पत्र वैध हैं। 

गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि इन 1827 FCRA पंजीकृत NGOs को मिलने वाले विदेशी योगदान का गलत उपयोग किया जा रहा था। ये NGO इस फंड को डायवर्ट कर रहे थे। इस संबंध में सरकार को कुछ शिकायतें प्राप्त हुई थीं। जिन पर कार्रवाई करते हुए भारत सरकार ने एनजीओ का एफसीआरए रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया। बता दें कि FCRA एक तरह का लाइसेंस होता है जो NGO को विदेश से चंदा लेने की अनुमति देता है।

भारतीय संसद के उच्च सदन राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान गृह राज्य मंत्री ने बताया कि 10 मार्च 2023 तक देश में 16,383 NGO ऐसे हैं जिनके FCRA पंजीकरण प्रमाण पत्र वैध हैं। इनमें से 14,966 ने वित्त वर्ष 2021-22 का वार्षिक रिटर्न भी भरा है। मंत्री ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में NGO को कुल 2,430.84 करोड़ रुपये का विदेशी फंड मिला था। साल 2021-22 में 905.50 करोड़ रुपये, 2020-21 में 798.18 करोड़ रुपये और 2019-20 में 727.16 करोड़ रुपये की विदेशी फंडिंग मिली।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मार्च की शुरुआत में भारत सरकार ने अमेरिकी उद्योगपति जॉर्ज सोरोस के समर्थन वाले थिंक टैंक सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च (CPR) पर एक्शन लेते हुए उसका FCRA पंजीकरण प्रमाणपत्र रद्द कर दिया था। राजीव गांधी फाउंडेशन और राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट का FCRA पंजीकरण प्रमाणपत्र भी सरकार रद्द कर चुकी है।

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